month vise

Tuesday, August 1, 2017

हुए थे मैथिली जो उर्मिला का गीत गए थे

poem by Umesh chandra srivastava 

                           (१)
हुए थे मैथिली जो उर्मिला का गीत गए थे ,
लखन 'औ' उर्मिला का बहुत बिधि लक्षण बताये थे। 
जहां सीमित रहे तुलसी वहीं का बिम्ब टटोला है ,
सुधी जन देख लो 'साकेत' में क्या बिम्ब खोला है। 
                           (२)
एक लीला धारी ठहरे-मनमोहन घनश्याम रे ,
दूजे धनुष चलाने वाले,राम-राम अविराम रे। 
दोनों का था कर्म विलक्षण-कर्मरत रहे जीवन भर ,
आशाओं के पुंज रहे वो ,राम-राम 'औ' श्याम रे। 



उमेश चंद्र श्रीवास्तव -
poem by Umesh chandra srivastava 

No comments:

Post a Comment

‘प्रकृति’ कविता संग्रह से -20

A poem of Umesh chandra srivastava मनु श्रद्धा हों , चाहे जो भी , आकर्षण से खिचे रहे। तभी तो सृष्टि का कुसुमित पल , सहसा फिर स...