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Wednesday, July 24, 2019

आज वह भोर सुहानी फिर है

A poem of Umesh chandra srivastava



आज वह भोर सुहानी फिर है ,
आज दामन की कहानी फिर है |
आज रोको नहीं, कसम से तुम ,
आज जीवन में रवानी फिर है |
छोड़ो बैठो-सभी कुछ काम छोड़ो ,
जरा पलकों से निगाहें मोड़ो |
प्रेम मूरत तुम्हारे मुखड़े पर ,
आज गुलशन की निशानी फिर है |
चलो जलपान करले थोडा हम ,
वजन का भार थोडा बढ़ जाए |
प्रेम आलोक में जो टिम-टिम है,
आज उस बात की कहानी फिर है |


उमेश चन्द्र श्रीवास्तव -

A poem of Umesh chandra srivastava

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