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Friday, March 30, 2018

राम राज्य का कल्प

A poem of Umesh chandra srivastava

राम राज्य का कल्प ,
तुम्हें बतलाना होगा।
मंदिर का निर्माण ,
वहीं करवाना होगा।

जहाँ राम का रसमंजन हो ,
जहाँ राम की बेल बढे ,
जहाँ राम का गुन चर्चित ,
व्यवहारों में वह अर्पित हो ,
वही भाव के तार,
तुम्हें फैलाना होगा।

सीता का व्यवहार ,
नारी का प्यार ,
प्रगति का सार ,
सभी झंकार तुम्हें ,
बतलाना होगा।

कृष्ण की सीख ,
गीत में प्रीत ,
रीत में हीत ,
तुम्हें सिखलाना होगा।

भ्रमित संगीत ,
यह  टालू नीति ,
सभी सुलझाना होगा।

यह अपना देश ,
मुखर प्रदेश ,
बाँट की नीति ,
हाट की प्रीत ,
सभी बिसराना होगा।
        राम राज्य का कल्प ,
        तुम्हें बतलाना होगा।





 उमेश चंद्र श्रीवास्तव -
A poem of Umesh chandra srivastava 

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