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Friday, February 10, 2017

छंदों का मतलब वेद, वर्ण-1

poem by Umesh chandra srivastava


छंदों का मतलब वेद, वर्ण ,
छंदों में मात्राएँ, गिनती।
वह शास्त्र जहाँ पर छंदों के ,
रचना, नियम, विवेचन हों।

छंदों का सीधा अर्थ हुआ ,
जो बंधा हुआ या रचा हुआ।
इस बंद में बिम्बों का खिलना ,
उद्गार सभी रस का मिलना।

वैसे तो छंद अनेकों हैं ,
दोहा ,चौपाई बहु चर्चित।
तुलसी की रामायण पूरी ,
इस छंद विधान में गाढ़ी हुई।

कबीरा ने भी तो दोहे में ,
अपनी सारी ही बात कही।
पर लीलाओं का वह चित्रण ,
खुब सूर ने अपने पद में लिखा।

मीरा का प्रेम समर्पण सब ,
मीरा के गीतों में ही बही।
सब बात पते की अनुभवगत ,
रहीम-रसखान ने खूब कही।

वह युग था केवल छंदों का ,
सुन्दर बातें ,सब छंदों में।
कुंडलियों में देखो खूब ही ,
उन लोगों ने सब बात कही।

अब नवयुग है ,नवयुग में तो.................

उमेश चंद्र श्रीवास्तव- 






poem by Umesh chandra srivastava






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